लुधियाना इलेक्ट्रोप्लेटर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन से की मुलाकात
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लुधियाना जून 2,

इलेक्ट्रोप्लेटर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की चेयरपर्सन रीना गुप्ता से मुलाकात कर पंजाब के इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं इंजीनियरिंग उद्योग के समक्ष आ रही विभिन्न समस्याओं एवं चुनौतियों संबंधी एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एसोसिएशन के प्रधान चंद्र प्रकाश सभरवाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल में राजन गुप्ता, उपाध्यक्ष; अशोक कुमार गुप्ता, सचिव; चरणजीत सिंह विश्वकर्मा, पूर्व प्रधान एवं चेयरमैन, यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UCPMA); तथा राजिंदर सिंह, प्रधान, फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल शेड्स एसोसिएशन शामिल थे।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बैठक में रीना गुप्ता, चेयरपर्सन; डॉ. लवनीत दुबे, सदस्य सचिव; तथा आर. के. रात्रा, मुख्य अभियंता उपस्थित थे।
राजन गुप्ता, उपाध्यक्ष ने कहा कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (MSME) वर्तमान समय में बढ़ती लागत, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं तथा मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने बोर्ड से अनुरोध किया कि ऐसे उद्योगों के प्रति दंडात्मक कार्रवाई के बजाय शिक्षाप्रद, सहयोगात्मक एवं मार्गदर्शक दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा पहली बार होने वाली त्रुटियों पर कठोर कार्रवाई के स्थान पर सुधार का अवसर दिया जाए।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की तथा बताया कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं इंजीनियरिंग उद्योग पंजाब विशेषकर लुधियाना की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन, निर्यात तथा औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
अशोक कुमार गुप्ता, सचिव ने कहा कि अधिकांश इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं इंजीनियरिंग इकाइयाँ MSME श्रेणी में आती हैं और कच्चे माल, बिजली, श्रम, परिवहन एवं वैधानिक अनुपालनों की बढ़ती लागत के कारण भारी दबाव का सामना कर रही हैं। उन्होंने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए जाने वाले कंसेंट शुल्क एवं अन्य शुल्कों में 50 प्रतिशत की कमी करने की मांग की।
इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए रीना गुप्ता, चेयरपर्सन, PPCB ने आश्वासन दिया कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब की शुल्क संरचना की तुलना अन्य राज्यों से की जाएगी तथा नियमों एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शुल्कों को यथासंभव तर्कसंगत एवं कम करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनुपालन बोझ कम करने, आवेदनों के शीघ्र निस्तारण, समयबद्ध अनुमोदन, अधिक डिजिटलीकरण तथा उद्योग-अनुकूल नियामक व्यवस्था की भी आवश्यकता पर बल दिया।
एसोसिएशन के प्रधान चंद्र प्रकाश सभरवाल ने राज्य सरकार द्वारा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) सहित एक समर्पित इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों को व्यक्तिगत रूप से एफ्लुएंट ट्रीटमेंट की उच्च लागत वहन करनी पड़ती है। यदि सरकार किफायती दरों पर ऐसा क्लस्टर विकसित करे और मौजूदा इकाइयों को वहां स्थानांतरित किया जाए तो इससे प्रदूषण में कमी आएगी तथा उद्योगों का खर्च भी कम होगा। चेयरपर्सन ने इस सुझाव की सराहना की।
चरणजीत सिंह विश्वकर्मा, पूर्व प्रधान ने मिक्स्ड लैंड यूज़ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम एवं शहरी क्षेत्रों में कार्यरत अनेक औद्योगिक इकाइयाँ इस समस्या से प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने इस विषय के स्थायी समाधान हेतु बोर्ड एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं औद्योगिक संगठनों के बीच नियमित संवाद एवं समन्वय स्थापित किया जाए ताकि उद्योगों को प्रभावित करने वाली नीतियाँ हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद बनाई जा सकें।
चेयरपर्सन, सदस्य सचिव एवं मुख्य अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल की सभी समस्याओं एवं सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना तथा आश्वासन दिया कि सभी मुद्दों पर नियमों के अनुसार सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। बोर्ड अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा दिए गए रचनात्मक सुझावों की सराहना की तथा पर्यावरण संरक्षण एवं औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अंत में, लुधियाना इलेक्ट्रोप्लेटर्स एसोसिएशन ने रीना गुप्ता, डॉ. लवनीत दुबे एवं आर. के. रात्रा का उद्योग की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनने एवं समय प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।





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